'आप तो समुद्री डकैती पर उतर आए...', होर्मुज टोल पर ट्रंप को लूला ने लपेटा
Trump Strait Of Hormuz Tax Plan
Trump Strait Of Hormuz Tax Plan: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लुला डा सिल्वा ने सोमवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क लगाने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना अमेरिका को एक "समुद्री डाकू" देश बना देगी. ट्रंप ने इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी को फिर से लागू करने और इस संकरे जलमार्ग को खुला रखने का खर्च निकालने के लिए वहां से गुजरने वाले सभी मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत का टैक्स लगाने का संकल्प लिया था.
फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा हमले शुरू किए जाने के बाद तेहरान ने पेट्रोलियम शिपमेंट के लिए इस बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग को ब्लॉक करना शुरू कर दिया था. इसके जवाब में वाशिंगटन ने ईरानी बंदरगाहों से जहाजों के आने-जाने पर रोक लगा दी थी. जून में दोनों पक्षों के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर हुए एक अंतरिम समझौते के बाद इन प्रतिबंधों में ढील दी गई थी, लेकिन लड़ाई में दोबारा तेजी आने के बाद ट्रंप ने इन्हें फिर से लागू करने का संकल्प लिया है.
साओ पाउलो राज्य में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए लुला ने कहा: "राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलेंगे. लेकिन वहां से निकलने वाले हर जहाज और हटाए जाने वाले हर शिप के लिए, तेल के मालिक को उन्हें 20% का भुगतान करना होगा." लुला ने कहा, "पहले इसे समुद्री डकैती (पायरेसी) माना जाता था."
उन्होंने आगे कहा, "अमेरिका जैसा बड़ा देश, जिसने मेरे विचार में लंबे समय तक समुद्री डकैती के खिलाफ लड़ाई लड़ी है, वह अब खुद एक समुद्री डाकू नहीं बन सकता." इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इस संघर्ष के कारण ब्राजील में ईंधन के साथ-साथ बीन्स, चावल, टमाटर और प्याज जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ रही हैं.
ब्राजील के 80 वर्षीय अनुभवी वामपंथी नेता अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में चौथे कार्यकाल के लिए किस्मत आजमा रहे हैं. ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के बाद, उनकी सरकार ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित करने के लिए कई अस्थायी उपायों की घोषणा की थी.
लुला ने कहा कि कच्चे तेल के निर्यात पर मार्च में लगाए गए 12 प्रतिशत टैक्स से मिलने वाले राजस्व का उपयोग कीमतों में बढ़ोतरी के असर को कम करने के लिए किया जा रहा है.